Monday, 27 February 2017

हम भी ज्ञानी

दुनिया में कितने लोग भूख प्यास से मर जाते हैं ,
हमारा फ़र्ज़ है कि हम ऐसे लोगों को ध्यान में रखते हुए त्याग करें ......
होली पर पानी कि बर्बादी ना करें
दीपावली पर पटाखे ना चलायें

कोई भी त्यौहार आते ही पूरा का पूरा सोशल मीडिया ऐसे ज्ञान से भर जाता है
मने हर कोई त्यागी और ज्ञानी हो जाता है

अब सुनो मेरी #छोटी_सी_अकल_की_बड़ी-सी_दौड़ .....
आप सभी के घर में कोई ना कोई छोटा बच्चा तो जरूर ही होगा
बहुत शैतानी करता होगा, खाना नही खाता होगा
आपकी बिलकुल भी नही सुनता होगा
तो जब एक छोटा सा बच्चा जो कि आप पर ही निर्भर है, आप उसको नही सिखा सकते तो और किसी को कैसे सिखा सकते हैं
मैं किसी की Parenting पर ऊँगली नही उठा रही , ना ही किसी को Hurt करना चाहती हूँ
बस एक बात जो मैं सोचती हूँ, वही सबसे शेयर करना चाहती हूँ

कोई भी इंसान अपना त्यौहार कैसे मनाता है, ये उसका अपना निर्णय है
हम किसी को रोक नही सकते
हम जो भी कर सकते हैं वो सिर्फ ये है कि खुद में सुधार .....
हमारी वजह से किसी को कोई परेशानी ना हो
अगर किसी को रंगों से अलर्जी है या कोई रंगों से नही खेलना चाहता तो उस पर रंग ना डालें
या दीपावली पर रास्ते में पटाखे ना रखें
बस इतना ही......

बाकी जैसे अपना मन हो वैसे त्यौहार मनाओ और जैसा दूसरा मनाना चाहे उसे मनाने दो
दो लाइन्स याद आ रही हैं, सोच रही हूँ कि लिख ही दूं-
"बदलना सारे ज़माने को इक ख्वाब सा है,
अगर तुम खुद को बदल लो तो इन्कलाब सा है"

इसी बात पर ..... होली है ......
रंग बिरंगी होली के मौसम की शुभकामनाएं
वैसे मैं बता दूं कि मुझे गुजिया खाने से कोई परहेज़ नही है, जो भी चाहे वो मेरे लिए ला सकता है
बस भांग वाली नही होनी चाहिए :D :D

Sunday, 26 February 2017

जागो रे

जागो रे ......
अलार्म अभी बजा नहीं , किसान अभी मरा नही, खिलाड़ी अभी हारा नही, रेप अभी हुआ नही
किसान को मरने दो, खिलाड़ी को हारने दो, रेप अभी होने तो दो , अलार्म अभी बजने तो दो
फिर,,,,, भाषण करेंगे , भूख हड़ताल करेंगे, फेसबुक पे क्रांति करेंगे
पर फिलहाल...... अलार्म अभी बजा नहीं ....

एकदम आज कि स्तिथि को दर्शाता हुआ विज्ञापन ....
एक आग सी है इसकी पंक्तियों में , कुछ कर गुजरने का जुनून
एक सन्देश भी है...
भले ही ये एक चाय का विज्ञापन है लेकिन थोड़ी देर के लिए सबके दिल और दिमाग को भेदता सा है
लेकिन.... थोड़ी ही देर बाद..................
थोड़ी देर में दूसरा विज्ञापन शुरू , सब चाय पीने लग जाते हैं और
ये अलार्म फिर से बंद हो जाता है सबके दिमाग में

अब सुनो,,,,,,,,, मेरी  #छोटी_सी_अकल_की_बड़ी_सी_दौड़
जहाँ तक मैं सोचती हूँ हम इसके लिए किसी पर दोष नही लगा सकते
इंसानी फितरत है ये -
भूख लगती है तो खाना खाता है
प्यास लगती है तो पानी पीता है
या कोई इंसान चुपचाप उसकी जिंदगी से चला जाए तब उसकी अहमियत को महसूस करता है
ठीक उसी तरह जब कोई घटना होती है तो क्रोधित होता है फिर भूल जाता है और अपने काम पर लग जाता है
यहाँ तक कि उस बुरी घटना से सम्बंधित लोग भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने लगते हैं
हालाँकि उनके दिल में यादें और टीस बाकी रह जाती है ,
लेकिन जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है

इसलिए....
क्रांति करें या ना करें लेकिन इन घटनाओं से सबक जरूर लेना चाहिए
हम किसी और को नही सिखा सकते
किसी को रोक नहीं सकते
लेकिन खुद में तो सुधार ला सकते हैं ना
अपने आस पास के लोगों और अपने बच्चों को अच्छा बनने कि सीख दे सकते हैं ,
जिससे कम से कम आगे ऐसी घटनाओं में कमी आये और एक अच्छे भविष्य कि नींव रखी जा सके

तो .......
जागो रे,,, चाय पियो और मुझे भी पिलाओ रे :)