Sunday, 26 February 2017

जागो रे

जागो रे ......
अलार्म अभी बजा नहीं , किसान अभी मरा नही, खिलाड़ी अभी हारा नही, रेप अभी हुआ नही
किसान को मरने दो, खिलाड़ी को हारने दो, रेप अभी होने तो दो , अलार्म अभी बजने तो दो
फिर,,,,, भाषण करेंगे , भूख हड़ताल करेंगे, फेसबुक पे क्रांति करेंगे
पर फिलहाल...... अलार्म अभी बजा नहीं ....

एकदम आज कि स्तिथि को दर्शाता हुआ विज्ञापन ....
एक आग सी है इसकी पंक्तियों में , कुछ कर गुजरने का जुनून
एक सन्देश भी है...
भले ही ये एक चाय का विज्ञापन है लेकिन थोड़ी देर के लिए सबके दिल और दिमाग को भेदता सा है
लेकिन.... थोड़ी ही देर बाद..................
थोड़ी देर में दूसरा विज्ञापन शुरू , सब चाय पीने लग जाते हैं और
ये अलार्म फिर से बंद हो जाता है सबके दिमाग में

अब सुनो,,,,,,,,, मेरी  #छोटी_सी_अकल_की_बड़ी_सी_दौड़
जहाँ तक मैं सोचती हूँ हम इसके लिए किसी पर दोष नही लगा सकते
इंसानी फितरत है ये -
भूख लगती है तो खाना खाता है
प्यास लगती है तो पानी पीता है
या कोई इंसान चुपचाप उसकी जिंदगी से चला जाए तब उसकी अहमियत को महसूस करता है
ठीक उसी तरह जब कोई घटना होती है तो क्रोधित होता है फिर भूल जाता है और अपने काम पर लग जाता है
यहाँ तक कि उस बुरी घटना से सम्बंधित लोग भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने लगते हैं
हालाँकि उनके दिल में यादें और टीस बाकी रह जाती है ,
लेकिन जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है

इसलिए....
क्रांति करें या ना करें लेकिन इन घटनाओं से सबक जरूर लेना चाहिए
हम किसी और को नही सिखा सकते
किसी को रोक नहीं सकते
लेकिन खुद में तो सुधार ला सकते हैं ना
अपने आस पास के लोगों और अपने बच्चों को अच्छा बनने कि सीख दे सकते हैं ,
जिससे कम से कम आगे ऐसी घटनाओं में कमी आये और एक अच्छे भविष्य कि नींव रखी जा सके

तो .......
जागो रे,,, चाय पियो और मुझे भी पिलाओ रे :) 

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