आज चलो फिर होली खेलें,पर कुछ रंग नए बनाएं
रंग बिरंगे रंगों में, कुछ मिजाज़ का तडका लगायें
इक रंग घोलें शरारत का, मन भर सबको सताएं
भागें- दौडें, उछलें-कूदें, मस्ती में खिलखिलाएं
शोखियों में डूब जाएँ फिर, खुद पे थोडा इतरायें
रूठा-रूठी छोड़ के थोडा, सबके नाज़ उठाएं
थोडा सा रंग मुहब्बत का, भर मुट्ठी में छिपा लायें
चुपके से रंग के खुद को ही, उन यादो में भीग जाएँ
आज चलो फिर होली खेलें............

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