करवटें, सलवटें, दर्द बेहिसाब है
मासूम सी सुकून की, नींद भी इक ख्वाब है
नुकीली सी पथरीली सी ये यादों की गलियां
छुइमुई सपनीली सी, नैनों की कलियां
छिलता है इश्क़ मेरा, न कोई हिज़ाब है
मासूम सी, सुकून की, नींद भी इक ख्वाब है
दौड़ती, भागती, मुसाफिर सी धड़कनें
रुके ख्याल ताकते, बुझे-बुझे अनमने
ठहरेंगे कभी पल दो पल, न कोई जबाब है
मासूम सी सुकून की, नींद भी इक खबाब है
उठी-गिरी, मचलती ये लहरों की हिचकियाँ
दबी-दबी, घुटी-घुटी, किनारों सी सिसकियां
बांध तोड़ ये अश्क़ आज, बहने को बेताब हैं
मासूम सी सुकून की, नींद भी इक ख्वाब है
-विभा
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